रश्त - हम रश्त की पिछली गलियों से गुजरते हुए उस घर तक पहुँचे जहाँ पुरानी यादें मेहमान थीं और ईर्ष्या शहीद "रेजा घोबादी मेहर" की मेज़बान थी, लेकिन उनके बेटे की नज़र में वह अभी भी एक नायक थे।