प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी 7वीं बार फ्रांस जा रहे हैं। 13-14 जून को नीस शहर में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। साथ ही ‘इंडिया इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। 16 जून को मोदी फ्रांस वापस लौटेंगे। मोदी 17 जून को G7 समिट में हिस्सा लेंगे। समिट में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नई साझेदारियों और AI के मुद्दे पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की कई वर्ल्ड लीडर्स समेत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात हो सकती है। इसके बाद मोदी पेरिस जाएंगे। दो दिन 14 से 16 जून पीएम स्लोवाकिया में रहेंगे। यहां प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यहां का पहला दौरा है। भारत इनोवेट्स क्या है 'भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की नया ग्लोबल इनोशिएटिव है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन साल के उद्घाटन के दौरान की थी। इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, IITs, IISc, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संगठनों से जोड़ना है। यह कार्यक्रम 14 से 16 जून तक नीस शहर में पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स (Palais des Expositions) में होगा। इस मेगा समिट का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों करेंगे। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की 'मॉडर्न इकोनॉमी' वाला देश कहा जाता है। ये देश हैं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी। पहले इसका नाम G-8 हुआ करता था। 2014 में रूस ने पड़ोसी देश क्रीमिया पर कब्जा कर लिया तो बाकी सदस्य देशों ने रूस को ग्रुप से बाहर कर दिया। इसका नाम G7 हो गया। G7 समिट में सबसे ज्यादा 7 बार शामिल होंगे पीएम मोदी G7 समिट के लिए आमतौर पर भारतीय प्रधानमंत्रियों को बुलाया जाता रहा है। 2004 से 2014 तक पीएम रहे मनमोहन सिंह ने पांच बार G-8 समिट में हिस्सा लिया था। पीएम मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में हुई समिट में बुलाया गया था। इसके बाद 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन अमेरिका ने तब समिट रद्द कर दी। इस एक साल को छोड़ दें तो 2019 से 2024 तक हर साल पीएम मोदी G7 समिट में शामिल हुए। 2021 में वे वर्चुअल मीडियम से इसमें शामिल हुए। 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान और 2024 में इटली में हुई G7 समिट में शामिल हुए। 2025 में कनाडा में हुई समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान dan situasi di Selat Hormuz, tantangan keamanan di Timur Tengah), kerja sama dan ketidakseimbangan ekonomi global, serta masalah Kecerdasan Buatan (AI). Selain itu, para pemimpin dan pejabat negara-negara anggota G7 mengadakan beberapa pertemuan dalam setahun, di mana banyak perjanjian dibuat dan pernyataan resmi dikeluarkan mengenai peristiwa-peristiwa besar dunia. Awalnya agenda G7 adalah mencari solusi terhadap isu-isu seperti tantangan ekonomi dan perubahan iklim. Belakangan isu-isu terkait politik dan keamanan juga ikut terlibat. Keputusan G7 mengenai isu-isu global berdampak pada seluruh dunia. Misalnya, G7 membentuk Dana Global untuk memerangi malaria dan AIDS pada tahun 2002. Memberikan bantuan ekonomi kepada negara-negara seperti Indonesia dan Thailand selama krisis keuangan pada tahun 1998. Memutuskan untuk menjatuhkan sanksi tegas terhadap Rusia dan membantu Ukraina selama perang Rusia-Ukraina. Apa perbedaan G7 dengan G20? G7 tidak memiliki kantor tetap dan negara-negara anggotanya tidak dapat mengesahkan hukum internasional apa pun. Isu terbesar di G20 adalah perekonomian dunia, sedangkan isu politik juga penting bagi G7. Selain negara-negara G7, negara-negara BRICS juga masuk dalam G20 yang dibentuk pada tahun 1999. Selain India, negara-negara tersebut antara lain Argentina, Australia, Brazil, China, Indonesia, Meksiko, Rusia, Arab Saudi, Afrika Selatan, Korea Selatan, Turki, dan Uni Eropa. Menurut Rajan Kumar, negara-negara dengan perekonomian baru dan berkembang juga telah dimasukkan dalam G20. Meskipun agenda G7 dan G20 serupa, namun saat ini G20 merupakan kelompok yang lebih efektif. Pada tahun 2020, Presiden AS Trump juga menyebut G7 sebagai kelompok yang sangat ketinggalan jaman.