SIR- عکس های تار از کارت های رای دهنده 30 کروری حذف می شود: اکنون به جای شماره خانه '00' نوشته نمی شود، آدرس ثبت می شود.
بینالمللی13/06/2026Dainik Bhaskar
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निर्वाचन आयोग घर-घर जाकर वोटरों की पहचान करने के अंतिम दौर में प्रवेश कर रहा है। अब बचे हुए 39 करोड़ 73 लाख मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक देने की तैयारी है। इस बीच भास्कर ने पड़ताल की कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के बाद मतदाता फोटो पहचान कार्ड यानी एपिक में क्या बड़े बदलाव आए हैं। एसआईआर के बाद अब तक तैयार 59 करोड़ मतदाताओं के फोटो न सिर्फ ताजा हैं बल्कि रंगीन भी हैं। चुनाव आयोग के 9 लाख 20 हजार से अधिक बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने मोबाइल से वोटरों के फोटो उनके पहचान पत्र के साथ जोड़कर मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाया है। इसके लिए बीएलओ ने कोई फीस नहीं ली। इसके अलावा, अब किसी भी वोटर का मकान नंबर ‘00’ दर्ज नहीं होगा, बल्कि सटीक पता लिखा जाएगा। एसआईआर पूरा होने के बाद एक से अधिक जगह नाम रखना अपराध माना जाएगा। अब तक एएसडीडी श्रेणी के तहत 2.6 लाख डुप्लीकेट वोटर आईडी हटाए जा चुके हैं। पहले कार्ड में फोटो नहीं थे, या फिर बहुत धुंधले पहले दौर में बिहार और दूसरे चरण में 12 राज्यों के मतदाताओं की घर-घर जाकर पुष्टि के बाद 59 करोड़ वोटरों के नए पहचान पत्र बने हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव कार्ड की फोटो का है। पहले के करीब 30 प्रतिशत मतदाता पहचान पत्र में फोटो या थे ही नहीं और थे भी तो इतने धुंधले थे कि पहचानना मुश्किल था। वजह ये कि संविधान में फोटो आईडी कार्ड का जिक्र ही नहीं है। ऐसे में फोटो के लिए मतदाता को बाध्य नहीं किया जा सकता था। पड़ताल से पता चला कि करीब 30 करोड़ फोटो नदारद, धुंधले, पुराने या पहचान से परे थे। जो फोटो थे वे 20-30 साल पुराने थे। एसआईआर के बाद अब तक तैयार 59 करोड़ मतदाताओं के फोटो न सिर्फ ताजा हैं बल्कि रंगीन भी हैं। चुनाव आयोग के 9 लाख 20 हजार से अधिक बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने मोबाइल से वोटरों के फोटो उनके पहचान पत्र के साथ जोड़कर मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाया है। इसके लिए बीएलओ ने कोई फीस नहीं ली। 1.
निर्वाचन आयोग घर-घर जाकर वोटरों की पहचान करने के अंतिम दौर में प्रवेश कर रहा है। अब बचे हुए 39 करोड़ 73 लाख मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक देने की तैयारी है। इस बीच भास्कर ने पड़ताल की कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के बाद मतदाता फोटो पहचान कार्ड यानी एपिक में क्या बड़े बदलाव आए हैं। एसआईआर के बाद अब तक तैयार 59 करोड़ मतदाताओं के फोटो न सिर्फ ताजा हैं बल्कि रंगीन भी हैं। चुनाव आयोग के 9 लाख 20 हजार से अधिक बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने मोबाइल से वोटरों के फोटो उनके पहचान पत्र के साथ जोड़कर मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाया है। इसके लिए बीएलओ ने कोई फीस नहीं ली। इसके अलावा, अब किसी भी वोटर का मकान नंबर ‘00’ दर्ज नहीं होगा, बल्कि सटीक पता लिखा जाएगा। एसआईआर पूरा होने के बाद एक से अधिक जगह नाम रखना अपराध माना जाएगा। अब तक एएसडीडी श्रेणी के तहत 2.6 लाख डुप्लीकेट वोटर आईडी हटाए जा चुके हैं। पहले कार्ड में फोटो नहीं थे, या फिर बहुत धुंधले पहले दौर में बिहार और दूसरे चरण में 12 राज्यों के मतदाताओं की घर-घर जाकर पुष्टि के बाद 59 करोड़ वोटरों के नए पहचान पत्र बने हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव कार्ड की फोटो का है। पहले के करीब 30 प्रतिशत मतदाता पहचान पत्र में फोटो या थे ही नहीं और थे भी तो इतने धुंधले थे कि पहचानना मुश्किल था। वजह ये कि संविधान में फोटो आईडी कार्ड का जिक्र ही नहीं है। ऐसे में फोटो के लिए मतदाता को बाध्य नहीं किया जा सकता था। पड़ताल से पता चला कि करीब 30 करोड़ फोटो नदारद, धुंधले, पुराने या पहचान से परे थे। जो फोटो थे वे 20-30 साल पुराने थे। एसआईआर के बाद अब तक तैयार 59 करोड़ मतदाताओं के फोटो न सिर्फ ताजा हैं बल्कि रंगीन भी हैं। चुनाव आयोग के 9 लाख 20 हजार से अधिक बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने मोबाइल से वोटरों के फोटो उनके पहचान पत्र के साथ जोड़कर मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाया है। इसके लिए बीएलओ ने कोई फीस नहीं ली। 1. SIR अभियान से मतदाता सूची में क्या बदल गया? सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब कोई भी मतदाता एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र या जगह पर अपना नाम दर्ज नहीं रख पाएगा। इस अभियान के तहत मतदाताओं को अपना मौजूदा निवास स्थान चुनने की पूरी छूट दी गई और अन्य सभी पुरानी जगहों से उनके नाम हटा दिए गए हैं। 2. कोई ज्यादा जगहों पर नाम दर्ज रखता है, तो क्या? आयोग ने इसके लिए सख्त हिदायत दी है। एसआईआर के दौरान सभी को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया गया था। इसके बावजूद अगर किसी मतदाता का नाम एक से अधिक जगह पर दर्ज पाया जाता है, तो इसे अब कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध माना जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी। 3. फर्जी या दोहरे वोटरों की पहचान के लिए क्या श्रेणी? इसके लिए आयोग ने ‘एएसडीडी’ श्रेणी बनाई है। इसका पूरा नाम ‘अबसेंट, शिफ्टेड, डुप्लीकेट, डिसीज्ड’ है। इसके तहत उनकी पहचान की जो या तो अनुपस्थित हैं, दूसरी जगह चले गए, जिनके पास दोहरे कार्ड हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। 4. अब तक कितने डुप्लीकेट कार्ड हटाए जा चुके हैं? इसके परिणामस्वरूप अब तक मतदाता सूची से 2.6 लाख डुप्लीकेट एपिक नंबर पूरी तरह से हटाए जा चुके हैं। 5. संदिग्ध वोटर्स को पकड़ने के लिए क्या तकनीक? इसके लिए चुनाव आयोग ने ‘फोटो सिमिलर इलेक्टोर’ और ‘डेमोग्राफिकली सिमिलर इलेक्टोर’ जैसे बेहद आधुनिक और एडवांस एनालिटिक सॉफ्टवेयर टूल्स का इस्तेमाल किया है, जो हूबहू मिलने वाले रिकॉर्ड्स को तुरंत पकड़ लेते हैं। 6. चुनावों में मतदान प्रतिशत पर क्या असर पड़ेगा? चूंकि सूची से मृतकों, अनुपस्थित और फर्जी मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, इसलिए अब वास्तविक और सक्रिय मतदाता ही रिकॉर्ड में बचे हैं। इससे आने वाले चुनावों में मतदान का प्रतिशत अधिक सटीक और बढ़ा दिखाई देगा। 7. उम्मीदवारों के लिए ये किस प्रकार मददगार होगी? केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी जो सचमुच वहां निवास करते हैं। असली वोटर्स की सही सूची मिलेगी। ------------
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