तृणमूल का पलायन कोई सामान्य अवसरवाद की लहर नहीं है। यह पश्चिम बंगाल की गहरी जड़ें जमा चुकी राजनीतिक संस्कृति को दर्शाता है, जहां सत्ता ऐतिहासिक रूप से एक ही पार्टी में केंद्रित रही है।