ऐसे बाजार में जो हाइपरपर्सनलाइजेशन के तर्क को अपनाता है, खोपड़ी अब अदृश्य नहीं है बल्कि साक्ष्य द्वारा निर्देशित डेटा, मेट्रिक्स और निर्णयों का स्रोत बन जाती है।