अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इससे अमेरिकी नौसेना दक्षिण चीन सागर के करीब पहुंच सकेगी, जो बीजिंग और ताइवान के बीच तनाव को देखते हुए रणनीतिक महत्व रखता है।