जिन घरों में 12 जून 2025 की सुबह खुशियों की विदाई के साथ शुरू हुई थी, वहां दोपहर होते-होते चीख-पुकार मच गई। अहमदाबाद विमान हादसे को आज (12 जून) ठीक एक साल हो गए। इस हादसे ने उदयपुर के 5 परिवारों को ऐसे जख्म दिए जो आज भी हरे हैं। भास्कर ने हादसे में जान गंवाने वाले उदयपुर के हिरणमगरी (सेक्टर-4) के रहने वाले वरदीचंद मेनारिया (54) के परिवार से मुलाकात की। एअर इंडिया के उस विमान हादसे ने इस हंसते-खेलते परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी। लंदन में नामचीन शेफ रहे वरदीचंद अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनकी पोती की आवाज और लंदन से आने वाले खाने के ऑर्डर्स आज भी इस घर के दरवाजों पर दस्तक देते हैं। हादसे के बाद बदला पता हादसे से पहले वरदीचंद की पत्नी लीला मेनारिया (49), अपने बेटों दीपक (32) और दिनेश (27) के साथ उदयपुर शहर में रहती थीं। पति की मौत के सदमे से लीला इस कदर टूटीं कि वे अब शहर में नहीं रहना चाहतीं। पूरा परिवार अब उदयपुर छोड़ वल्लभनगर क्षेत्र के रूंडेड़ा गांव में शिफ्ट हो चुका है। दोनों बेटे दीपक और दिनेश दिन में काम के सिलसिले में उदयपुर आते हैं, लेकिन रात को कोई न कोई एक भाई मां के पास गांव जरूर रुकता है। 6 साल की पोती एक साल से स्कूल नहीं गई वरदीचंद की 5 साल की पोती छवि का पिछले साल ही उदयपुर के एक नामी स्कूल में HKG में एडमिशन कराया था। गर्मियों की छुट्टियों के बाद उसे स्कूल जाना था, लेकिन इसी बीच विमान हादसे में दादा की जान चली गई। इस सदमे और गांव शिफ्ट होने के चक्कर में छवि सालभर से स्कूल नहीं जा पाई। अब वह 6 साल की हो चुकी है। 'लंदन से आज भी आते हैं पापा के हाथ के स्वाद के दीवानों के फोन' बेटे दीपक बताते हैं- पापा लंदन में कैटरिंग का काम करते थे और खुद शेफ थे। वहां गुजराती और पंजाबी परिवारों में उनके हाथ के खाने की भारी डिमांड थी। दीपक ने भावुक होते हुए कहा- पापा का जो नंबर हम यहां चला रहे हैं, उस पर आज भी लंदन के परिवारों के वॉट्सएप कॉल आते हैं। वे पापा के हाथ के स्वाद को याद कर ऑर्डर देते हैं। जब हम उन्हें इस हादसे के बारे में बताते हैं, तो उन्हें यकीन ही नहीं होता। पोती आज भी भेजती है मैसेज 6 साल की छवि को आज भी लगता है कि उसके दादा लंदन गए हैं। वह आए दिन दादा के उसी लंदन वाले वॉट्सएप नंबर पर वॉयस मैसेज भेजती है- 'दादा कब आओगे?'। दीपक कहते हैं कि जब हम उस मासूम के वॉयस नोट को सुनते हैं, तो अपनी आंखों के आंसू रोक नहीं पाते। अपनी धरती पर बिजनेस करने का था सपना दीपक ने बताया कि पापा हमेशा के लिए लंदन छोड़ने वाले थे। 12 जून 2025 को जब वे जा रहे थे, तो उन्होंने कहा था कि बहू की डिलीवरी होते ही वे वापस भारत आ जाएंगे। इसके बाद पूरे परिवार को विदेश टूर पर ले जाएंगे और फिर हमेशा के लिए उदयपुर में ही सेटल हो जाएंगे। पापा का प्लान था कि दीपक के इंटीरियर डिजाइनिंग के काम को बड़े स्तर पर बढ़ाएं और छोटे बेटे दिनेश के फिजियोथैरेपी सेंटर को भी एक ही कैंपस में शुरू करें। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 4,000 तस्वीरों में दिखा पापा का वॉलेट एअर इंडिया के मुताबिक हादसे के बाद यात्रियों के 22,000 से ज्यादा निजी सामान सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें से 8,000 सामानों की पहचान (पासपोर्ट आदि से) हो चुकी है, जबकि 14,000 की पहचान नहीं हुई है। दीपक ने बताया- कंपनी ने एक पोर्टल पर करीब 4 हजर तस्वीरें अपलोड की थीं। मैंने एक-एक फोटो को ध्यान से देखा, तो पापा का वॉलेट नजर आया, जिसमें उनका विजिटिंग कार्ड और फोटो साफ दिख रही थी। हमने क्लेम तो कर दिया है, लेकिन सामान अभी तक नहीं मिला। मां और बेटों की इच्छा- रिपोर्ट सार्वजनिक करें वरदीचंद की पत्नी, बेटे दीपक और दिनेश ने कहा कि उनकी इच्छा है कि सबसे पहले तो इस हादसे की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। विमान के ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग बताई जाए और दोषी कौन हैं, वे सामने आए। उन्होंने बताया कि पीएम रिलीफ फंड और राज्य सरकार की ओर से 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मिली है। टाटा की ओर से एक करोड़ मुआवजा दिया गया। वे बोले- पापा का सामान भी दिया जाए और हादसे के बाद टाटा समूह ने जो ट्रस्ट बनाया था, उसने किसको मदद की, यह भी सामने आना चाहिए। टाटा समूह की नौकरी छोड़नी पड़ी बेटे दिनेश को हादसे के बाद 12 जनवरी 2026 को टाटा कंज्यूमर में टेरिटरी सेल्स एग्जीक्यूटिव की नौकरी दी गई थी। खुद टाटा कंज्यूमर के सीईओ सुनील डीसूजा उनके घर आए थे। दिनेश ने उन्हें बताया था कि घर में 90 साल के दादा-दादी हैं, इसलिए वे उदयपुर से बाहर नहीं जा सकते। शुरुआत में ट्रेनिंग उदयपुर में हुई, लेकिन दूसरे महीने से ही उन्हें 200 किलोमीटर दूर और फिर कोटा-अजमेर में 7-7 दिन रहने के निर्देश दे दिए गए। मजबूरी में दिनेश को यह नौकरी छोड़नी पड़ी। सोशल मी ولم تقبل عائلة الركاب الذين فقدوا حياتهم في الحادث الهزيمة. وتم إنشاء صفحة باسم "العدالة لشركة طيران الهند 171" على إنستغرام، والتي من خلالها تطالب جميع عائلات الضحايا بالعدالة والكشف عن الأسباب الحقيقية وراء الحادث. فقدت عائلات أودايبور هذه أيضًا أحباءها… كان الابن والابنة في طريقهما لزيارة لندن. وكان ابن شوبه وابنته شاجون من رجل الأعمال الرخامي سانجيف مودي، من سكان ساهيلي ناجار بمدينة أودايبور، ضحيتين أيضًا في حادث تحطم الطائرة. وكانوا في طريقهم لزيارة لندن. بعد الانتهاء من ماجستير إدارة الأعمال، كان الإخوة والأخوات يتعاملون مع أعمال والدهم. اقرأ الأخبار كاملة... توفيت أيضًا بايال خاتيك (22 عامًا)، من سكان جوجوندا، أودايبور، والتي كانت متجهة إلى لندن لدراسة بكالوريوس الطب والجراحة، ابنة سوريش خاتيك في حادث تحطم طائرة أحمد آباد. تعيش عائلة بايال في هيماتناغار بولاية غوجارات منذ فترة طويلة. كان بايال ذاهبًا إلى لندن لدراسة بكالوريوس الطب والجراحة. وفاة الابنة قتلت الوالدين بينما كانا على قيد الحياة. قراءة الأخبار كاملة... براكاش ميناريا من قرية روهيدا بالقرب من إنتالي بلوك مافلي في أودايبور، والذي كان يعيش في لندن لمدة 19 عامًا، كان أيضًا ضحية لتحطم الطائرة. كان يعيش في الخارج لمدة 19 عامًا وكان يطبخ في لندن. وكان يستعد أيضًا لنقل عائلته بأكملها إلى لندن بعد مرور بعض الوقت، لكن الرحلة AI-171 أثبتت أنها الرحلة الأخيرة لأحلامه. قراءة الخبر كاملا... 13 شخصا من ولاية راجاستان كانوا ضحايا. في 12 يونيو 2025، تحطمت طائرة الخطوط الجوية الهندية AI-171 المتجهة إلى لندن بعد اصطدامها بنزل كلية الطب BJ في ميغانينغار، أحمد آباد (غوجارات). وأدى ذلك إلى مقتل 241 شخصًا على متن الطائرة و19 شخصًا كانوا متواجدين على الأرض. ولم يبق سوى راكب واحد على قيد الحياة. ومن بين القتلى 13 شخصا من ولاية راجاستان. ومن بين هؤلاء، كان 5 من سكان بانسوارا، و5 من أودايبور، و1 من بيكانير، و1 من بالي، و1 من بارمر. اقرأ الخبر كاملاً... --------- اقرأ هذا الخبر أيضًا... آخر حديث مع الأب قبل 12 دقيقة من تحطم الطائرة: قال رجل الأعمال - سأعود خلال 10 أيام، وأصبح جدًا بعد ساعات قليلة من الوفاة، أراد بايال دراسة الماجستير في التكنولوجيا من لندن، وتوفي في حادث تحطم طائرة: كان يساعد الأسرة عن طريق إعطاء الرسوم الدراسية للأطفال؛ أجريت مكالمة فيديو مع العائلة من المطار