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بدأ التمرد بعد 14 يومًا من هزيمة ماماتا: كتب 19 نائبًا متمردًا رسالة إلى رئيس لوك سابها في 18 مايو، بما في ذلك يوسف وسايوني غوش.

بدأ التمرد بعد 14 يومًا من هزيمة ماماتا: كتب 19 نائبًا متمردًا رسالة إلى رئيس لوك سابها في 18 مايو، بما في ذلك يوسف وسايوني غوش.

دولي 12/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 14
⚡ الخلاصة في سطرين

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस यानी TMC में फूट ममता की हार के 14 दिन बाद ही शुरू हो गई थी। बंगाल विधानसभा का रिजल्ट 4 मई को आया था। 14 दिन बाद यानी 18 मई को 19 सांसदों ने बगावत करते हुए लोकसभा स्पीकर को लेटर लिखा। बागी सांसदों ने अलग गुट बनाने की मांग की है। स्पीकर को भेजी गई चिठ्ठी में जिन 19 सांसदों ने साइन किए, वो लेटर अब सामने आया है। इनमें यूसूफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुल 20 सांसदों ने बगावत की है। एक नाम जो बचा है वो बहुत बड़ा नेता है। जल्द ही उनका नाम भी सामने आ जाएगा। TMC के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, दावा किया जा रहा है कि 20 सांसद ममता से अलग हो गए हैं। TMC के 19 बागी लोकसभा सांसदों के नाम… 4 दिन में 4 राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे चुके हैं TMC के लोकसभा सांसदों के अलावा राज्यसभा सांसद भी टूट रहे हैं। पिछले 4 दिनों में चार राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। 8 जून को सुखेंदु शेखर ने सदस्यता के साथ पार्टी छोड़ी। फिर 10 जून को सुष्मिता देव अलग हो गईं। 11 जून को प्रकाश चिक और कोयल मल्लिक ने इस्तीफा दे दिया। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे। दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है। संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है। ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है। नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है। INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी?

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