2017 में मिकाएला गार्सिया की हत्या ने लिंग परिप्रेक्ष्य के बिना न्यायपालिका के परिणामों को उजागर किया। इसीलिए मिकाएला कानून पारित किया गया था, लेकिन दो वर्षों से इसका व्यावहारिक रूप से अनुपालन नहीं किया गया है।