बाल मनोवैज्ञानिक नताल्या नौमोवा ने कहा कि किसी बच्चे को जबरदस्ती शिविर में नहीं भेजा जाना चाहिए: यात्रा से पहले उसकी इच्छा, स्वतंत्रता और मनोवैज्ञानिक तत्परता को ध्यान में रखना जरूरी है। और पढ़ें