जब वे सेवानिवृत्त होते हैं, तो कुछ वरिष्ठ लोग अर्थ की इतनी गहरी हानि में डूब जाते हैं कि उनकी पहचान ही नष्ट हो जाती है। एक मनोचिकित्सक इन मूक टूटने और उन पर प्रतिक्रिया करने के तरीकों का वर्णन करता है।