नसीरुद्दीन शाह की सिनेमाई शक्ति से प्रेरित, इम्तियाज अली ने एक गहन विचारोत्तेजक कथा गढ़ी है जो टूटे हुए समय में मानवीय संबंध और उपचार के लिए एक सामूहिक दर्द की तरह महसूस होती है।