लिहन्ना प्रकरण के मौके पर कई राजनीतिक हस्तियों ने बाल अपराधियों के खिलाफ रासायनिक बधियाकरण के इस्तेमाल पर बहस की, जहां नाबालिगों के खिलाफ यौन हिंसा की रिपोर्टों और शिकायतों के प्रसंस्करण के संबंध में न्याय प्रणाली की कई खामियों को उजागर किया गया।