यात्रियों की शिकायत है कि घर पहुंचने में उन्हें दो से चार घंटे का समय लगता है। अधिकारियों का कहना है कि उन स्थानों पर जलग्रहण क्षेत्रों, जल निकासी वेंट और संबंधित बुनियादी ढांचे का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है जहां मानसून के दौरान बार-बार जलभराव होता है।