पीठ ने कहा कि डीजीसीए के लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने न तो जीतेंद्र कृष्ण वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया और न ही उनका लाइसेंस निलंबित करने का निर्णय लेने से पहले उन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की अनुमति दी।