वास्तविक जीवन की गवाही और पुलिस रिकॉर्ड से प्रेरित होकर, शोभिता ठाकुर की खिलावाड़ी जाति और परंपरा से फंसी महिलाओं के शोषण पर प्रकाश डालती है।