मजिस्ट्रेट अपने फैसले में मानता है कि फांसी का यह तरीका क्रूर और असामान्य सजा पर संवैधानिक प्रतिबंध का उल्लंघन करता है। इस पद्धति की तुलना संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों द्वारा "यातना" के एक रूप से की जाती है।