कोर्ट का कहना है कि सोशल नेटवर्क फेसबुक पर गाजा पट्टी में तैनात एक सैनिक के बारे में गलत जानकारी प्रकाशित की गई थी, जिसे युद्ध अपराधी के रूप में पेश किया गया था.