Caso Twisha – ficha de quem identificou o laço não encontrada: Grandes falhas na investigação policial expostas; A sogra estava contatando Giribala com detalhes do diário do caso.
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, लेकिन इससे पहले हुई पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों में सामने आया है कि जांच से जुड़े अहम तथ्य पहले ही उनके पास पहुंच रहे थे। इसी के चलते वह समय रहते अग्रिम जमानत लेने में सफल हो गईं। शुरुआत में ही सास गिरिबाला और पति समर्थ को संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। 13 मई 2026 को सुबह करीब 9:42 बजे सब इंस्पेक्टर (SI) दिनेश शर्मा ने फंदे की रस्सी जब्त की थी, फिर भी दस्तावेजों में रस्सी की पहचान करने वाले का स्पष्ट विवरण दर्ज नहीं है। ट्विशा के परिजन की ओर से भोपाल कोर्ट में एडवोकेट अंकुर पांडे पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि रस्सी को तत्काल एम्स अस्पताल भेजने के बजाय SI की कार में रख दिया गया। बाद में उसे जांच के लिए भेजा गया। हैरानी यह है कि इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार एसआई पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बता दें, 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचे जवाब में यह भी कहा गया है कि रस्सी से संबंधित जब्ती दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा था। उस समय समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह आरोपी नहीं थे, इसलिए कानूनी रूप से उन्हें उस दस्तावेज तक पहुंच का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के जवाब के साथ यह दस्तावेज दाखिल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इससे जांच से जुड़े दस्तावेज आरोपियों तक पहले ही पहुंच रहे थे। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एक ही दिन तैयार हुए अन्य जब्ती दस्तावेज जवाब में यह भी उल्लेख किया गया है कि उसी दिन तीन अन्य जब्ती ज्ञापन भी तैयार किए गए थे, जिनमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का विवरण दर्ज था। इसे आधार बनाते हुए जांच प्रक्रिया में अंतर होने का दावा किया गया है। मामले में उठाए गए सभी बिंदु गिरिबाला सिंह की ओर से 27 मई 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका के दौरान प्रस्तुत जवाब से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब जांच एजेंसियां साक्ष्यों की जब्ती, उनकी सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही हैं। इलाज करने वाले मनोचिकित्सक से पूछताछ ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब ट्विशा का इलाज करने वाले मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्विशा का वास्तव में इलाज हुआ था या नहीं और यदि हुआ था तो उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी। दरअसल, आरोपी गिरिबाला सिंह की ओर से ट्विशा को मानसिक रूप से परेशान और मनोरोग से जुड़ी समस्या होने का दावा करते हुए भोपाल कोर्ट में उसके इलाज से संबंधित कुछ दस्तावेज पेश किए गए थे। 15 मई को गिरिबाला सिंह को भोपाल कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली थी। अब सीबीआई टीम इन मेडिकल दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से संपर्क कर उनसे इलाज और काउंसलिंग से जुड़ी जानकारी ली गई। इन सवालों पर सीबीआई ने की पूछताछ सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने डॉक्टर से यह जानने का प्रयास किया कि ट्विशा ने कब-कब उनसे इलाज कराया, वह किन समस्याओं को लेकर आई थी, उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी और काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी निजी जिंदगी से जुड़े किन पहलुओं का जिक्र किया था। सीबीआई यह भी जांच रही है कि क्या ट्विशा वास्तव में किसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थी या फिर उसके इलाज से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल मामले में किसी अन्य उद्देश्य से किया गया। वहीं डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई द्वारा पूछताछ किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मरीज से जुड़ी निजी जानकारी साझा करना उसके अधिकारों का उल्लंघन है, इसलिए वह ट्विशा की काउंसलिंग के दौरान हुई व्यक्तिगत बातों का खुलासा नहीं कर सकते। फिलहाल सीबीआई मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों को जोड़कर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। गिरिबाला ने जिन्हें सजा सुनाई ऐसे 29 कैदी भी जेल में ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के आरोपों के बाद जेल प्रबंधन ने दोनों को अस्पताल वार्ड से बैरक में शिफ्ट कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद गिरिबाला की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट है। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त प्रहरी तैनात किए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। सुरक्षा बढ़ाने की वजह यह बताई जा रही है कि गिरिबाला ने जज रहत Dos arguidos condenados, 29 estão alojados nesta cadeia.