Atualizações de Bhaskar: Tremores sentidos em Sikkim e Bengala devido ao terremoto no Butão; A terra tremeu por alguns segundos
भूटान में रविवार देर रात 5.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके सिक्किम और पश्चिम बंगाल में भी महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंप का केंद्र भूटान के पुनाखा क्षेत्र के पास था। इससे भारत में गंगटोक, सिलीगुड़ी, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार समेत कई इलाकों में लोगों ने कुछ सेकंड तक धरती में कंपन महसूस की। लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। आज की अन्य बड़ी खबरें… सिक्किम से सिलीगुड़ी जाते समय लापता 4 लोगों के शव तीस्ता नदी से मिले, कार भी बरामद सिक्किम के चार लोगों के शव रविवार को पश्चिम बंगाल में तीस्ता नदी से बरामद किए गए। ये सभी 5 जून को गंगटोक जिले से सिलीगुड़ी जा रहे थे और रास्ते में लापता हो गए थे। जांच के दौरान NH-10 के पास कार की बैटरी और हेडलाइट के कुछ हिस्से मिले। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। NDRF, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से नदी में डूबी कार का पता लगाया गया, जिसके अंदर चारों के शव मिले। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि कार तीस्ता नदी में गिर गई था। मृतकों की पहचान स्मारिका नेओपाने (28), शैब्या नेओपाने (27), टीका दहाल (27) और पांच साल की दित्या छेत्री के रुप में की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सभी लोग सिलीगुड़ी में इलाज करा रहे अपने माता-पिता से मिलने जा रहे थे। दिल्ली फायर सर्विस में 850 से ज्यादा पद खाली, आखिरी बार 2011 में भर्ती हुई थी; होटल अग्निकांड के बाद खुलासा दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की तैयारियों और संसाधनों पर सवाल उठने लगे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली फायर सर्विस में फायरफाइटर के 3,312 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 853 पद खाली पड़े हैं। वहीं स्टेशन अधिकारी के 90 स्वीकृत पदों में केवल 18 पदों पर ही अधिकारी कार्यरत हैं। सूत्रों के मुताबिक स्टेशन अधिकारी पद के लिए आखिरी बार सीधी भर्ती साल 2011 में हुई थी। दिल्ली फायर सर्विस ने 1969 में वायरलेस संचार प्रणाली शुरू की थी। सूत्रों के अनुसार तब से अब तक वायरलेस फ्रीक्वेंसी सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। विभाग अभी भी दो वीएचएफ (VHF) चैनलों पर निर्भर है। हालांकि रेडियो सेट आधुनिक डिजिटल डिवाइस में बदल दिए गए हैं, लेकिन संचार ढांचा लगभग पुराना ही बना हुआ है।ती दिल्ली में ऊंची इमारतों और शहरी विस्तार के साथ फायर स्टेशनों की संख्या 17 से बढ़कर 71 हो गई है। इसके बावजूद पुरानी संचार व्यवस्था के कारण कई बार कंट्रोल रूम, फायर स्टेशन और मौके पर मौजूद कर्मचारियों के बीच संपर्क में दिक्कतें आती हैं।