Заявление о краже 7 миллионов рупий из храма Айодхья Рам: Ахилеш сказал: «Молчание правительства подозрительно; Бывший министр заявил: Чампат Рай должен поклясться Богом
📖 Источник статьи — 🇮🇳 Хиндиसपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का दावा है कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपए का चढ़ावा गायब हो गया है। उन्होंने रविवार को X पोस्ट कर लिखा, पूरी दुनिया में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील खबर है। राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपए की रकम गायब मिली है। अखिलेश ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सरकार को भी घेरा है। लिखा, करोड़ों रुपए गायब होना मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। सपा अध्यक्ष ने कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है, क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनानती समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। पूर्व मंत्री का दावा- साढ़े 7 करोड़ रुपए की चोरी की गई अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय सपा सरकार में वन और मनोरंजन कर राज्य मंत्री रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उनका दावा है कि राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी 5 से 7.50 करोड़ तक हो सकती है। अगर चोरी नहीं हुई है तो ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय सामने आएं और प्रभु श्रीराम की कसम खाकर कहें कि सबकुछ झूठ है। अगर बात सच है तो एफआईआर करवाएं। उन्होंने कहा, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये चोरी कितने समय से हो रही थी। ट्रस्ट के किन-किन सदस्यों तक ये पैसा गया है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था जानिए… राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के लोगों की मौजूदगी में करते हैं। यह काम सीसीटीवी की निगरानी में होता है। दान की रकम को रजिस्टर पर चढ़ाया जाता है। फिर उसे राम मंदिर परिसर में ही बने लॉकर में रख दिया जाता है। अगले दिन रुपए बैंक में जमा कर दिए जाते हैं। ट्रस्ट का मुख्य खाता अयोध्या धाम के भारतीय स्टेट बैंक में है। चढ़ावे की रकम के ऑडिट का पूरा काम टीसीएस (टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज) की निगरानी में किया जाता है। राम मंदिर में चढ़ावा कितना आता है। इसकी जानकारी ट्रस्ट की बैठक में ही दी जाती है। आखिरी बार दिसंबर 2025 में चढ़ावे की जानकारी दी गई थी। मंदिर पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च 13 दिसंबर, 2025 को मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जानकारी सामने आई थी कि अब तक ट्रस्ट को कुल 4,575 करोड़ रुपए मिले हैं। पिछले 5 साल 9 महीने में मंदिर निर्माण, श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विस्तार, जमीन और भवन की खरीद सहित अन्य कई कामों पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। तब ट्रस्ट के पास लगभग 2100 करोड़ रुपए बचे थे। अयोध्या के राम मंदिर में रोज एक करोड़ रुपए से ज्यादा का दान राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को हुई थी। बीते दो सालों में राम मंदिर की तस्वीर तेजी से बदली है। मंदिर की आय का मुख्य स्रोत दान और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज है। ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर की अचल संपत्तियों में लगभग 70 एकड़ का मुख्य परिसर और उसके आसपास की अधिग्रहित भूमि है। साथ ही निर्माणाधीन मंदिर की भव्य संरचना (जिसकी निर्माण लागत ही ₹1,800 करोड़ से अधिक है), इसकी कुल संपत्ति को ₹6,000 करोड़ से ₹8,000 करोड़ के पार ले जाती है। 5 फरवरी 2020 को बना था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ वकील केशव पराशरण सहित कुल नौ सदस्यों की नियुक्ति की थी। इसी दिन शाम को श्रीराम जन्मभूमि के अधिग्रहीत क्षेत्र के तत्कालीन रिसीवर और मंडलायुक्त मनोज कुमार मिश्र ने बैंक खातों सहित समस्त प्रभार ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य और अयोध्या नरेश विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को सौंप दिया था। हालांकि, ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक 20 फरवरी 2020 को हुई थी, जिसमें मणिराम छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव चुना गया। दैनिक भास्कर ने अखिलेश के आरोपों पर बात करने के लिए मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। --------------------------------- ये खबर भी पढ़े... Большое разоблачение Бхаскара о мошенничестве с храмом Рама: Земля, на которой обвинялся траст, была куплена лидером СП за 2 крора рупий в 2011 году. Расследование Дайника Бхаскара сделало большое открытие относительно мошенничества с землей, купленной для строительства храма Рама в Айодхье. Стало известно, что земля площадью 100 бисва (около 3 акров), за которую Шри Рам Джанмабхуми Тирт Кшетра Траст был обвинен в коррупции, была куплена лидером партии Самаджвади Султаном Ансари в 2011 году за 2 крора рупий. Сам Султан продал его Ram Mandir Trust за 18,5 крор рупий. Читать полную новость…
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