पवार कहते हैं, "बढ़ोतरी भले ही सिर्फ दो रुपये से शुरू हुई हो, लेकिन समय के साथ बढ़ोतरी बढ़ती गई और आज हम देख सकते हैं कि कीमतें कितनी बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर आम लोगों के वित्त और दैनिक जीवन पर पड़ता है।"