भारत युद्धक्षेत्र के पहले 100 किलोमीटर पर 52,000 करोड़ रुपये क्यों खर्च कर रहा है?
⚡ ⚡ त्वरित सारांश
भारत के रक्षा अधिग्रहणों का ध्यान महंगी बड़ी वस्तुओं से हटकर संघर्ष के शुरुआती घंटों के लिए महत्वपूर्ण हथियारों पर केंद्रित हो रहा है। हाल की स्वीकृतियों में एंटी-ड्रोन सिस्टम, कम दूरी की वायु रक्षा और कामिकेज़ ड्रोन को प्राथमिकता दी गई है, जो ऑपरेशन सिन्दूर से मिले सबक और दो मोर्चों पर आकस्मिकता की तैयारी को दर्शाता है। यह कदम सामरिक बढ़त और उत्तरजीविता पर जोर देते हुए नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की दिशा में एक कदम का प्रतीक है।