⚠️ شما آفلاین هستید
🏠 خانه 🏆 جام جهانی ۲۰۲۶ local بین‌المللی خاورمیانه ورزش اخبار جام جهانی فناوری اقتصاد سلامت فرهنگ جامعه محیط زیست
آزمایش سیستم دفاع بالستیک چند لایه هند با موفقیت انجام شد: هند پنجمین کشوری است که به این فناوری دست یافته است که موشکی را از فاصله 5000 کیلومتری ساقط می کند.

آزمایش سیستم دفاع بالستیک چند لایه هند با موفقیت انجام شد: هند پنجمین کشوری است که به این فناوری دست یافته است که موشکی را از فاصله 5000 کیلومتری ساقط می کند.

بین‌المللی 13/06/2026 Dainik Bhaskar 👁 11
⚡ خلاصه سریع

भारत अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, यहां तक कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों का भी मुकाबला कर सकता है। DRDO ने 10 और 11 जून को लगातार 3 फ्लाइट टेस्ट किए गए, जिनमें मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। इसमें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्लास तक के खतरों समेत बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने और बेअसर करने की क्षमता भी शामिल है। यह तकनीक दुश्मन की मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले हवा में ही नष्ट करने में सक्षम होती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टेस्टिंग की तस्वीरें X अकाउंट पर शेयर की हैं। इसके साथ-साथ नेवल एंटी शिप मिसाइल-मीडियम रेंज का भी टेस्ट किया गया। इसे भारत की समुद्री स्ट्राइक और डिफेंस स्किल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके साथ भारत उन खास देशों के ग्रुप में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल-लेवल की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता है। भारत से पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी। मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तस्वीरें… क्या होती है इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल या ICBM आसान भाषा में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल कोइबहुत लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल कहा जा सकता है। यह ऐसी मिसाइल होती है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकती है। आमतौर पर 5,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है। इसके अलावा यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती है। यह मिसाइल रॉकेट की तरह ऊपर अंतरिक्ष की ओर जाती है, फिर बहुत ऊंचाई से पृथ्वी की ओर लौटती है और बहुत तेज स्पीड से टारगेट पर हमला करती है। इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिना जाता है। बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के फेज-II का परीक्षण हो चुका इससे पहले, भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के फेज-II का सफलतापूर्वक फ्लाइट टेस्ट किया था। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के टेस्ट के तहत LC-IV धामरा से एक टारगेट मिसाइल लॉन्च की गई। यह मिसाइल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल जैसी थी। जमीन और समुद्र पर तैनात वेपन सिस्टम रडार ने इसे डिटेक्ट किया और AD इंटरसेप्टर सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया। मिसाइल टेस्टिंग से पहले 11 गांव खाली कराए गए थे ओडिशा के बालासोर जिले में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तय मिसाइल टेस्ट से पहले दोनों दिन 11 गांव खाली कराए थे। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) के लॉन्च पैड-3 के 3.5 किमी के दायरे से 11,442 लोगों को अस्थायी तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। हालांकि टेस्टिंग के बाद शाम को उन्हें घर लौटने की अनुमति दे दी गई थी। ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से जब भी लंबी दूरी या रणनीतिक महत्व की मिसाइलों का परीक्षण होता है, तब लॉन्च पैड के आसपास के गांवों को एहतियातन खाली कराया जाता है। पढ़ें पूरी खबर… ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… भारतीय सेना को मिले 106 कामिकाजे ड्रोन: 180 किमी की रेंज, 450kmph की रफ्तार; न जैमिंग का असर, न टारगेट से भटकेंगे भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्वदेशी रक्षा कंपनी SMPP ने सेना को 106 टर्बोजेट इंजन से चलने वाले ‘कामिकाजे’ ड्रोन सौंप दिए हैं। इन्हें ‘पीसकीपर (अग्निवेग)’ नाम दिया गया है। यह ड्रोन 180km की रेंज तक हमला कर सकते हैं। साथ ही 450kmph की रफ्तार पकड़ सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

📖 منبع مقاله — 🇮🇳 هندی ← بازگشت

🔖 ذخیره‌شده‌ها