तीन न्यायाधीशों को तीन अलग-अलग राज्यों में कदाचार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे संघीय न्यायपालिका की प्रणाली पर अपने स्वयं के रैंकों में खराब व्यवहार को नियंत्रित करने का दबाव बढ़ रहा है।