आयोग ने आगे चेतावनी दी है कि धोखाधड़ी न केवल वित्तीय तबाही का कारण बन रही है बल्कि गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात और मानवाधिकारों का उल्लंघन भी कर रही है।