लेखापरीक्षा का निष्कर्ष है कि कार्यक्रम "अनावश्यक और अक्षम" था। संभावित लाभार्थियों में से केवल 12% ही शामिल हुए और आधा खर्च विज्ञापन और कानूनी राय पर था।